तब एक व्यक्ति जो मेरे पिता जी की उम्र के होंगे, वो मेरे पास आये , बोले बेटा ठुम कुछ बोल नहीं रहे . मैंने कहा में सुन रहा हु |
अच्छा उन्होंने मुझसे पुछा - बेटा एक शब्द में बताओ महाभारत और रामायण में फरक क्या है |
मै - सोचने के बाद , पता नहीं , एक शब्द में |
वो बोले - मरियादा , एक में भुरपुर उलंघन है, दुसरे में उस का सम्मान है | तभी महाभारत का स्थान घर में नहीं होता |
मै - ...
वो फिर बोले - महाभारत में साब लोगोने आपने बहु बेटा का चीर हरण होते देखा , और रामायण में भारत को देखो, खदु से राज किया |
मै - ..
वो फिर बोले - एक बूँद दही का, बीस किलो दूद को ख़राब करने के लिए काफी होती है |
I was standing there thinking. What was it hinting at? My silence? or what ..
वो फिर बोले - बेटा कभी कभी मंथन कर लिया करो |
I was there thinking have we lost the art of "thinking".